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उत्तम ,अधिगम सिद्धांत, कारक ,विशेषताएं सुपर गुड नोट्स

अधिगम का शाब्दिक अर्थ होता है सीखना

      एक व्यापक सतत एवं जीवन प्रयाग चलती प्रक्रिया है जिसे अधिगम करते हैं।

    उदाहरण के लिए जैसे बालक दीपक जुड़ा है और प्रेम से हाथ पीछे खींच लेता है।

  परिभाषाएं _

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1. बूडवर्थ के अनुसार_

 रू   "सीखना विकास की एक प्रक्रिया निर्धारित की जाती है, जो जीवन भर देखता रहता है।

2. त्वचार के अनुसार_ 

   "सीखना व्यवहार में दबंगता की स्थापना प्रक्रिया है,

3. जैकी गिलफोर्ड ._

   "व्यापार में परिवर्तन ही सीखने की प्रक्रिया है,

4. काल्विन के अनुसार_

  पहले से निर्मित व्यवहार के अनुभव में स्टार परिवर्तन को अधिगम करते हैं।

5. क्रो एवम क्रो के अनुसार_

   सीखने की आदत ज्ञान एवं कार्य का अर्जुन अधिगम है।

     इस तरह से विभिन्न वैज्ञानिक अपनी मतानुसार परिभाषाएं देते हैं।

सीखने के नियम_

सीखने के सिद्धांत में वैज्ञानिक एल्थम नाइट में विशिष्ट नियम दिए गए हैं जिनके माध्यम से हम अनुभव कर सकते हैं कि सीखने की प्रक्रिया कैसे संचालित की जाती है।

1. मुख्य नियम (प्रैमारी क्लेम)

A. तत्परता का नियम

बी। प्रयोग के नियम

C. उपयोग का नियम

D. उपयोग के नियम

ई। प्रभाव का नियम

2. गौरा नियम (द्वितीयक दावा)

A. बहु अनुक्रिया का नियम

B. मानसिक स्थिति का नियम

C. आंशिक क्रिया का नियम

D. समानता का नियम

ई. अक्ष परिवर्तन के नियम।

     A. शास्त्रीय अनुबंध नियम


साहचर्य द्वारा सीखे पलवल का सिद्धांत एवं वाटसन का सिद्धांत 

       B. क्रिया प्रसूत का अनुबंध नियम

  पुनर्बलन के द्वारा सीखना

       

         C. खर्च का नियम


अधिगम की वैकल्पिक अवधारणाएं

1. व्यवहारवादी बौद्धिक सिद्धांत

अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अलग-अलग अपनी माता के अनुसार यह विवेचन किया जिसमें से वैज्ञानिक थानाईक पलवल और स्किनर वाटसन प्रमुख हैं।

2. ज्ञानात्मक व क्षेत्र साधारण सिद्धांत_

    ज्ञानात्मक योग संगठन के अंतर्गत देखा जाता है कि वैज्ञानिक अपने मत के अनुसार इच्छा जाहिर करते हैं कोहलर लेविन वर्तमीर प्रमुख थे।

    अधिगम में योगदान देने वाले कारक_

1. अधिगम से संबंधित कारक

2. शिक्षक से संबंधित कारक

3. विषय वस्तु से संबंधित कारक

4. प्रक्रिया से संबंधित कारक

     शिक्षण में योगदान सामग्री

अध्यापन__

     अधिगम की प्रक्रिया को सरल प्रभाव कारी एवं रुचिकर बनाने वाले उपकरण को शिक्षण सहायक सामग्री कहते हैं जिनके तीन प्रमुख भाग होते हैं IA तीन प्रमुख घटक के विषय में जानते हैं कि कौन से तीन प्रमुख भाग होते हैं।

1. दृश्य सामग्री।

   दृश्य सामग्री के तहत आने वाले आपकी चित्र पुस्तक में नमूने चार्ट आदि रेखा चित्र ग्राम बुलेटिन बोर्ड जिस पर से यह अनुभव प्राप्त होता है कि दर्शकों को देखकर हमारी इच्छाएं जागृत होती हैं और उन्हें हम सीखते हैं समझते हैं और मानसिक रूप से उन्हें समझते हैं ऐसा करते हैं जिसे देसी सामग्री के रूप में दिया जाता है।

2. श्रव्य सामग्री।

  श्रद्धा सामग्री के तहत आने वाले रेडियो टेप रिकॉर्ड हैं जिनके माध्यम से ध्वनि या सुनने के कारण हम अपने भीतर एक प्रेरणा जगाते हैं और समझते हैं कि सीखने की प्रक्रिया उत्सुक हो जाती है।

3. श्रव्य सामग्री।

   इन के अंतर्गत आने वाले दोनों श्रेणी के तथ्य आते हैं जिनमें सिनेमा टेलीविजन नाटक कंप्यूटर आदि आते हैं जिनमें हम चलचित्र देख के अनुभव दस्तावेज हैं और सीखते हैं और अधिगम के रूप में देते हैं।

   शिक्षण अधिगम का सिद्धांत

1. व्यक्तिगत विचलन का सिद्धांत।

2. छात्र केंद्रित आ का सिद्धांत

3. सक्रिय सहयोग का सिद्धांत।

    शिक्षण प्रक्रिया से संबंधित सिद्धांत

1. ग्रेडिएंट का सिद्धांत

2. अधिगम पाठ्यक्रम से संबंधित सिद्धांत


        सूक्ष्म शिक्षण

     लघु शिक्षण को शिक्षण के रूप में दिया जाता है जिसके कुछ भाग होते हैं।

1. स्नातक

2. शिक्षण

3. पृष्ठ निर्धारक

4. पुन: पाठ योजना

5. पून: शिक्षण

6. पुन:पृष्ठ पोषण

    शिक्षण सहायता

एन एल गैज के अनुसार

निम्न प्रकार से पाठ किया गया है।

1. उद्दीपन

2. शमीपता

3. पूर्णवालन

4. पूर्ण प्रश्न

5. छात्र व्यवहार ज्ञान

6. व्याख्यान

7. योजना पुनरावृति

8. विस्‍तार

9. मौन अशाब्दिक अंतर प्रक्रिया

10. प्रश्न पूछना

11. वि ऑफर प्रश्न

12. दृष्टांतवादी

13. उच्च स्तरीय प्रश्न करना

14. संप्रेषण

     शिक्षण दृष्टिकोण रचना

  शिक्षण व्यूह रचना का अर्थ शिक्षा राजनीति का निर्माण या तरीका जिसे हम तीन प्रकार से विभाजित करते हैं।

A. कथन कथन

B. विधि प्रदर्शन

C. कार्य निष्पादन

 स्टोन मेरियस के अनुसार शिक्षण को दो भागों में बांटा गया है।

A. वर्चस्ववादी विचारधारा की रचना

1. व्याख्यान

2. प्रदर्शन

3. ट्यूटोरियल

4. अभिक्रमित

5. चेतावनी

B. प्रजातांत्रिक दृष्टिकोण रचना।

1. प्रश्नोत्तर

2. खोजो

3. जकड़ना

4. प्रोजेक्टर

5. सामूहिक वाद विवाद

6. गृह कार्य

7. कंप्यूटर रचना आदि।

 अधिगम से संबंधित समस्याएं तथा जोखिम वाले बच्चों की आवश्यकता सीआरओ के अनुसार__

ऐसे लड़के को ऐसा लिखा हुआ जाता है जो किसी भी रूप में उसे सदा प्रिंट में भाग लेने से रोकता है और उसे सीमित रखता है ऐसे लड़के को हम कमज़ोर लड़के कहते हैं।

जीपी फोर्स के अनुसार__

   जब शारीरिक स्थिति के कारण कुछ कठोर से लड़के को सामाजिक स्वीकृति प्राप्त नहीं होती है तब उसके द्वारा उत्पन्न मनोविश्लेषण दोष भी बढ़ने लगता है।

ए डी एल के अनुसार___

एक बच्चा जो शरीर से प्रभावित होता है उसमें हीनता की स्थिति होती है, जिस प्रकार की भावना से बालक को थोड़ी भी संतुष्टि और प्रतिक्रिया मिलती है, वह उसकी वरीयता वरीयता प्राप्त करता है, इन अनुपातों को प्राप्त करना चाहता है, उसे शारीरिक संबंध के कारण देता है है।

जिसके रूप हैं

1. शारीरिक रूप से असंतुलित होने के कई कारण होते हैं।

अंग संचालन में विभिन्न प्रकार के दोष होते हैं, जैसे छात्रों के माथे का हाथ, कमर पर आदि में समानता कुछ देखी गई है, पढ़ने के क्रम में कठोर परिश्रम प्रभावित होते हैं साथ ही साथ सटीकता में कठोर अनुभव किया जाता है।

अ. दृष्टि दोष से प्रभावित बालक

    समावेशी शिक्षा के तहत सीएसीपी ने देखा है कि बच्चे पाठ्य पुस्तकों में पढ़ने में अक्षम होते हैं जो झुकते हैं, बार-बार आंखों को देखते हैं और आंखों के लिए पढ़ने में कठोर महसूस करते हैं।

ब. श्रावण दोष से प्रभावित बालक

      इस दोष से युक्त में ही निम्न प्रमुख कारण होते हैं कान की सूरत में दोष का अक्सर बातें रहना अटैचमेंट में बहुधा दर्द की शिकायत को बहुतदा को जलाते रहना अच्छी तरह से सुनने के लिए सिर को एक तरफ से दूसरी तरफ कुजना रेटिंग्स और मुड़ें प्रोजेक्ट से निवेदन करना श्रुतलेख में बहुत कठिनाइयाँ आने वाले अध्यापिका के चेहरों को बहुत अधिक ध्यान देने से बोलने का समय वाड़ी में कठिनाइयाँ इस देश में प्राप्त होती हैं।

सी. अस्ति तथा मांसपेशियों से प्रभावित बालक

     शारीरिक रूप से मानसिक रूप से असंतुलित बच्चों की सेटिंग एवं उनकी स्थिति के समाधान के लिए शिक्षक की सहानुभूति का रवैया अपनाना तुरंत चाहिए और कक्षा में प्रवेश व उसके बैठने के लिए स्थिरता की व्यवस्था सबसे अधिक आवश्यक हो जाती है तो लड़कों के लिए कक्षा में विशेष प्रकार की व्यवस्था करनी चाहिए।

डी. वाक से प्रभावित बालक

    बच्चे के बोलने में ला रहे हैं तो इससे आपको विभिन्न प्रकार की व्यवस्था से जुड़ाव करना होगा।

प्रमुख अधिगम 

ए अफेयर्स

    इस गलती के तहत भाषा एवं संप्रेषण अधिगम को अफजा कहते हैं। पीड़ित छात्र मौखिक रूप से अपने विचार को अभिव्यक्त प्रदान करने में सीखने को कठिन अनुभव करते हैं जिसे डीफ्रेज़ियर कहते हैं।

बी एलेक्सिया

  गलती के तहत किसी प्रकार की छाती के कारण पढ़ने में अक्षमता को अलेक्सिया कहा जाता है जिसे बच्चा पढ़ नहीं पाता है मस्तिक विकार माना जाता है।

सी. डिस्लेक्सिया

   डिस्लेक्सिया का अर्थ होता है पठन विकार रीडिंग में कठिन आय वाले होते हैं। जिसे डिलेक्सिया कहते हैं।

डी। एपेक्सिया

   इस विकार से पीड़ित छात्र फिरने वाला नूपुर बोलने वाला व्यक्ति नहीं हो पाता है जिसे अप्रेक्सिया कहते हैं।

ई। डिसग्राफिया 

   लेटर में आने वाले विकार को डिसग्राफिया कहता है कि कौन सा बच्चा लिखा हुआ ठीक से नहीं पाता है कि हाथ पैर हाथ से संबंधित गड़गड़ाहट दिखाई देता है।

एफ डिस्केल्कुलिया

    ऐसे बच्चे जो अंकगणितीय समझ में अभय अनुभव होते हैं, हम उसे ग्राफिकल डिस्कवरी कुल लैकिकल कहते हैं।

जी। डिस्टीमिया

    इस विकार के तहत मनोविकार का विरोध प्रभाव बालक के अधिगम पर पड़ता है जिससे मन स्मृति चित्र विधि हमेशा बनी रहती है।

एच. डिस्मोरफिया

इन विकार के तहत जीवों को भ्रम हो जाता है और शरीर में कुछ रंग बहुत छोटे दिखाई देते हैं, वह अपने शरीर के विभिन्न अंगों की तुलना दूसरे से करने लगता है, इसी को हम डिस्मोरफिया कहते हैं।

अधिगम विकार वाले छात्रों की पहचान

   अधिगम आवश्यकताओं वाले छात्रों की पहचान के बारे में बताया जाता है।

1. उचित प्रकार के छात्र पढ़ाई नहीं कर रहे हैं और मौखिक स्पेक्ट्रम पूर्ण है।

2. वाचिक एक्सप्रेशन मेवा कठोर अनुभव करते हैं।

3. समय सारणी के अनुसार कार्य करना मन को रहना उदास आदि लक्षण प्रकट होते हैं।

4. मालिनी कार्य विलंब से करना श्रेणी में विलंब से आने वाली देयता है।

5. स्कूल में सामान्य समय लाइन को छोड़ें।

6. शब्दों को अलग-अलग करके पढ़ना

7. ध्वनि उच्चारण रात में उच्च आय होगी


कैलाशसर